मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के छोटे से गांव के एक बेटे ने बड़ा मुकाम हासिल किया है। 23 वर्षीय संघर्ष ठाकुर ने छोटी सी उम्र में ही अपने बचपन के सपने को सच कर दिखाया है। संघर्ष ठाकुर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गया है।
छोटे से गांव का बेटा बना लेफ्टिनेंट
संघर्ष ठाकुर मंडी जिला की पंचायत निचला लोट के पपराहल गांव का रहने वाला है। संघर्ष के लेफ्टिनेंट बनने से उसके गांव और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
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संघर्ष ठाकुर ने स्नातक की पढ़ाई वल्लभ कॉलेज मंडी से की है। संघर्ष ने UPSC द्वारा आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा CDS 2024 को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया है।
बचपन से ही था सपना
संघर्ष के पिता श्याम लाला ठाकुर सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में अनुभाग अधिकारी हैं। संघर्ष की मां रमा देवी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग में फार्मेसी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। संघर्ष के पिता ने बताया कि संघर्ष का बचपन से ही सेना में अधिकारी बनने का सपना था जो अब उसने कड़ी मेहनत कर पूरा कर दिखाया है।
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युवाओं के लिए मिसाल की पेश
लेफ्टिनेंट बनकर संघर्ष ने ना सिर्फ अपने माता पिता का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक मिसाल पेश की है। संघर्ष के चयन से क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी प्ररेणा मिलेगी।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश के देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि का दर्जा भी दिया गया है। प्रदेश के कई नौजवान युवा भारतीय सेना में भर्ती को देश की सेवा कर रहे हैं और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। पहले के वक्त में जहां आमतौर पर सूबे के युवा सेना में शामिल होकर देश के लिए अपनी जान की बाजी लगा देते थे। वहीं, आज के समय में प्रदेश की युवतियां भी युवकों के साथ कंधे से कंधा मिलकर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।