शिमला। हिमाचल के संगीत को विश्व पटल पर पहुंचाने के लिए कई कलाकारों ने अपना अमूल्य योगदान दिया है। अभी हाल ही में हिमाचल में नाटी किंग से पूरे देश में प्रसिद्ध हिमाचली कलाकार कुलदीप शर्मा को ब्रिटिश संसद ने किया सम्मानित गया है।
वहीं, हिमाचल की एक और कलाकार ने संगीत की दुनिया में अपनी खनक से शास्त्रीय व सुगम संगीत में 'AO' ग्रेड हासिल किया है। हिमाचली संगीत को देश-दुनिया में पहचान दिलवाने वाले केएल सहगल की बेटी डॉ. सविता सहगल हिमाचल की पहली ऐसी गायिका बनी है जिन्हें ये सम्मान मिला है।
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संगीत में मिला 'AO' ग्रेड
डॉ. सविता जिला सोलन के डिग्री कॉलेज कंडाघाट में संगीत विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद अपनी सेवाएं दे रहीं हैं और कई मंचों पर अपनी गायन कला का लोहा मनवा चुकी हैं। शास्त्रीय व सुगम संगीत के साथ- साथ उन्हें गजल गायन में भी दक्षता हासिल है। अपने पिता जैसे ही संगीत के प्रति उनके समर्पण के कारण उन्हें आकाशवाणी से शास्त्रीय संगीत गायन और सुगम संगीत जैसी कठिन गायन विधाओं में 'AO' ग्रेड हासिल हुआ है।
दरअसल, बीते वर्ष प्रसार भारती/आकाशवाणी केंद्रीय स्वर परीक्षा बोर्ड दिल्ली नेस्वर परीक्षा आयोजित की थी। उस परीक्षा के आंकलन में डॉ. सविता सहगल को शास्त्रीय व सुगम संगीत में 'AO' ग्रेड मिला है।
किसी हिमाचली को नहीं मिला ये सम्मान
खास बात यह की डॉ. सविता ना सिर्फ हिमाचल को भारती/आकाशवाणी केंद्रीय स्वर परीक्षा बोर्ड में यह ग्रेड दिलवाने वाली पहली महिला कलाकार हैं। बल्कि इस अवार्ड को पाने वाली पहली महिला हैं। आकाशवाणी शिमला की स्थापना 1955 में हुई थी। वर्ष 1955 से लेकर अब तक यानी वर्ष 2024 तक आकाशवाणी शिमला के सेवाकाल में डॉ. सविता सहगल के अलावा अन्य कोई गायिका शास्त्रीय व सुगम संगीत के क्षेत्र में यह ग्रेड प्राप्त नहीं कर पाया है।
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पंडित सोमदत्त बट्टू से सीखी है संगीत साधना
डॉ.सविता सहगल ने अपनी संगीत साधना का क्रेडिट पिता डॉ. केएल सहगल व गुरु पंडित सोमदत्त बट्टू और एक अन्य गुरु मालाश्री प्रसाद को भी समर्पित किया है उनके गुरु पंडित सोमदत्त बट्टू पटियाला घराने के महान कलाकार हैं। पंडित सोमदत्त बट्टू को हाल ही में पद्म सम्मान से अलंकृत किया गया है।
पिता के एल सहगल से प्राप्त हुआ मार्गदर्शन
डॉ. सवीता के पिता डॉ. केएल सहगल को भी वर्ष 2022 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिल चुका है और वो हिमाचल में संग्रीत की दुनिया में एक प्रसिद्ध नाम हैं- जिनके गाने आज भी हिमाचल की शोभा में चार चांद लगाते हैं।
आपको बता दें, वर्ष 1955 में आकाशवाणी शिमला की स्थापना के बाद सहगल भी हिमाचल प्रदेश के ऐसे पहले कलाकार बने हैं जिन्हें टॉप ग्रेड मिला है। सिरमौर जिला से ताल्लुक रखने वाले डॉ. कृष्ण लाल सहगल ने वर्ष 1971 में आकाशवाणी शिमला से लोक संगीत स्वर परीक्षा उत्तीर्ण की।
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वह आकाशवाणी द्वारा आयोजित अनेक संगीत गोष्ठियों में अग्रणी पंक्ति के कलाकार रहे हैं। शिमला के अलावा आकाशवाणी जांलधर, जम्मू कश्मीर और धर्मशाला केंद्रों से भी इनके लोक गीत प्रसारित होते रहे हैं।
डॉ. सविता सहगल ने इन्हीं महान कलाकारों की शरण में अपनी संगीत साधना को निखारा है। डॉ. सविता सहगल अपने शिष्यों में भी बहुत लोकप्रिय हैं। प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में शिष्यों को संगीत की शिक्षा देते हुए वह इस समय कंडाघाट डिग्री कॉलेज में सेवारत हैं।
डॉ. सविता सहगल ने संगीत विषय में एमए की डिग्री गोल्ड मेडल के साथ हासिल की हुई है। वे आकाशवाणी शिमला और दूरदर्शन शिमला में वर्ष 1995 और वर्ष 2009 से क्रमश: सुगम व शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत करती आ रही हैं।