#हादसा
May 2, 2026
हिमाचल: विवि परिसर में बने टैंक में डूब गया BSC ऑनर्स का छात्र, जवान बेटे की देह लेकर लौटा परिवार
नौणी यूनिवर्सिटी में बने खुले पानी के टैंक ने छीन ली होनहार छात्र की जिंदगी
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सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में घर से पढ़ने आए युवक की पानी के टैंक में डूबने से मौत हो गई। जवान बेटे की मौत की खबर जैसे ही उसके परिवार को मिली, उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार को क्या पता था कि जिस बेटे को उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए वह हिमाचल की इस प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पढ़ने भेज रहे हैं, वहां से वह अब जिंदा लौट कर नहीं आएगा।
दरअसल यह हादसा हिमाचल के सोलन जिला में स्थित डॉ यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में में हुआ है। जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। बीएससी ऑनर्स बागवानी के चौथे वर्ष के छात्र मंजीत जायसवाल की मौत परिसर में बने एक खुले जल भंडारण टैंक में डूबने से हो गई। यह हादसा न केवल एक परिवार के सपनों को तोड़ गया, बल्कि विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गया है।
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जानकारी के अनुसार यह करीब 12 फीट ऊंचा जल भंडारण टैंक वर्ष 2007 में बनाया गया था, जिसका उपयोग सिंचाई और अन्य कार्यों के लिए किया जाता है। हैरानी की बात यह है कि इतने वर्षों से यह टैंक खुला ही पड़ा था। न तो इसे ढका गया और न ही इसके आसपास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए। हालांकि विश्वविद्यालय में अन्य कम ऊंचाई वाले टैंकों को ढक दिया गया है, लेकिन यह ऊंचा टैंक खुला छोड़ दिया गया और यही लापरवाही एक छात्र की जान ले गई।
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हादसा उस समय हुआ जब विश्वविद्यालय में स्पोर्ट्स मीट चल रही थी और अधिकांश छात्र.शिक्षक कार्यक्रम में व्यस्त थे। इसी दौरान मंजीत हॉस्टल से टहलते हुए डेयरी के पास पहुंचे और टैंक के ऊपर चढ़ गए। बताया जा रहा है कि टैंक पर चढ़ने के लिए कोई सीढ़ी नहीं थी। मंजीत ने पास बने सीमेंट के पिलर का सहारा लेकर ऊपर पहुंचने की कोशिश की। ऊपर खड़े होने की जगह बेहद संकरी थी। संतुलन बिगड़ने और संभवतः हवा के झोंके के कारण उनका पैर फिसल गया और वे सीधे टैंक में जा गिरे।
घटना के समय पास में एक अन्य छात्र मौजूद था, लेकिन उसके पास मोबाइल फोन नहीं था, जिससे तुरंत मदद नहीं मिल पाई। विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन टैंक की ऊंचाई और वहां चढ़ने के साधनों की कमी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी हो गई। जब तक मंजीत को बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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मंजीत जायसवाल उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के निवासी थे और पढ़ाई में बेहद होनहार माने जाते थे। उनका चयन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ;प्ब्।त्द्ध की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के माध्यम से हुआ था जो उनकी मेहनत और प्रतिभा का प्रमाण है। वहीं जिस बेटे को माता.पिता ने बड़े सपनों के साथ दूर भेजा थाए उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। वे अपने बेटे को जिंदा देखने की उम्मीद में आए थे, लेकिन उन्हें उसका शव लेकर लौटना पड़ा।
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इस घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। इतने बड़े और खतरनाक ढांचे को वर्षों तक बिना ढके छोड़ देना गंभीर लापरवाही मानी जा रही है। अगर समय रहते इस टैंक को सुरक्षित कर दिया जाता, तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया है।
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नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. राजेश्वर चंदेल ने बताया कि छात्र की मौत विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत दुखद घटना है, भगवान उसकी आत्मा को शांति दें। उन्होंने बताया कि छात्र के माता पिता को मौके का निरीक्षण करवाया गया है, और उन्होंने किसी तरह की कोई शिकायत नहीं की है। वहीं पुलिस और फोरेंसिक टीम ने भी हर पहलु से जांच की है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है और परिजन बेटे के शव को लेकर वापस लौट गए हैं।
सौंप दिया गया है और हादसे के कारणों की जांच अभी जारी है।