Wednesday, July 17, 2024
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90 वर्षीय दादा को कंधे पर बैठकर माता चिंतपूर्णी के दरबार पहुंचा पोता

ऊना। हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा पड़ाव आता है जब उसे दूसरों की सहारे की जरूरत पड़ती है। माना जाता है कि पोता अपने दादा की सबसे खास दोस्त होता है। दोनों में लगाव और प्यार की कोई सीमा नहीं होती है। वहीं, बहुत सारे पोते-पोतियां ऐसे होते हैं जो अपने दादा-दादी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं।

दादा-पोते का अनोखा प्यार

ऐसा ही दादा-पोते का अनोखा प्यार हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी माता मंदिर में देखने को मिला है। यहां एक पोता अपने दादा को कंधों पर बैठा कर मां के दरबार में दर्शनों के लिए लेकर पहुंचा।

कंधों पर बैठाकर पहुंचाया दरबार

बता दें कि विजय कुमार अपने 90 वर्षीय दादा चेतराम को राजस्थान के अजमेर से ऊना स्थित चिंतपूर्णी माता के दरबार में लेकर आया है। इस दौरान विजय कुमार के साथ उनका पूरा परिवार भी मौजूद था। मंदिर में लगी लिफ्ट का सहारा ना लेकर विजय ने श्रद्धालुओं के साथ लाइन में लगकर माता के दर्शन किए।

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पोते ने निभाया अपना फर्ज

विजय ने बताया कि उसके दादा की आखों की रोशनी बहुत कम हैं और वह ठीक से अकेले चल भी नहीं पाते हैं। उनकी इच्छा थी कि वह माता चिंतपूर्णी के दरबार में दर्शन करने के लिए जाएं। इसलिए उसने अपना फर्ज निभाया और अपने दादा को अपने कंधों पर उठाकर माता के दरबार में पहुंच गया।

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भक्तों का लगी रहती है भीड़

बता दें कि हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी माता मंदिर में माता एक पिंडी रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि चिंतपूर्णी माता भक्तों की चिंताओं को दूर करती हैं। माता के दरबार में हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धुालु दर्शन करने आते हैं।

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कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु ने भगवान शिव के ब्रह्मांडीय विनाश के नृत्य को समाप्त करने के लिए मां सती के शरीर को 51भागों में विभाजित कर दिया, तो वह हिस्से भारत के अलग-अलग स्थानों पर बिखर गए। मान्यता है कि चिंतपूर्णी में सती माता के चरण गिरे थे।

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