Thursday, July 18, 2024
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नेहा रोजाना 20 km पैदल चल जाती थी स्कूल: हासिल किया 8वां स्थान

नाहन। हिमाचल में बीते रोज 12वीं के परीक्षा परिणाम में प्रदेश की कई बेटियों ने मेरिट में जगह बनाई। इनमें कई बेटियां ऐसी हैं, जिन्होंने विकट परिस्थितियों का सामना करते हुए यह मुकाम हासिल किया। ऐसी ही एक बेटी हिमाचल के सिरमौर जिला के रोनहाट की रहने वाली नेहा है। नेहा के पिता की उस समय मौत हो गई थी, जब वह छठी कक्षा में पढ़ती थी। नेहा रोजाना 20 किलोमीटर पैदल स्कूल आती जाती थी, फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और आज मेरिट लिस्ट में जगह बनाई।

कला संकाय में प्रदेश भर में पाया 8वां स्थान

बेला गांव की रहने वाली नेहा बीपीएल परिवार से संबंध रखती है। नेहा राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिलाई में पढ़ती है। नेहा ने कला संकाय में 500 में से 480 अंक प्राप्त कर प्रदेश भर में 8वां स्थान प्राप्त हासिल किया। बताया जा रहा है कि नेहा को पढ़ने के लिए रोजाना घर से स्कूल और फिर स्कूल से घर 20 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ता था।

नेहा जंगल के रास्ते 20 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचती है स्कूल

नेहा के चाचा नरेश वर्मा ने बताया कि कड़ाके की सर्दी में बच्ची सुबह साढ़े पांच बजे अकेले घर से निकलकर मौसम की विपरीत परिस्थितियों में जंगल के रास्तों से होते हुए सुबह नौ बजे तक स्कूल पहुंच जाती थी।

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नेहा जब छह साल की थी उसी दौरान बीमारी के चलते उसके पिता की मौत हो गई थी। जिसके बाद नेहा की मां कमला देवी ने दो बेटों और तीन बेटियों का पालन पोषण किया।

मां ने खेत में काम कर किया बच्चों का पालन पोषण

नेहा की माता कमला देवी देखों में काम करके बच्चों का पालन पोषण करती है। आर्थिक तंगी के बाद भी कमला देवी ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। जिसके चलते ही आज नेहा ने कड़ी मेहनत से मां की मेहनत को साकार कर दिया।

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नेहा की बड़ी बहन निकिता कॉलेज में द्वितीय वर्ष की छात्रा है, छोटा भाई अमन 12वीं, श्रुति 10वीं और सुनील 8वीं में पढ़ता है। बच्चे पढ़ाई के साथ साथ खेतों में मां का हाथ भी बंटाते हैं।

शिक्षिका बनना चाहती है नेहा

नेहा ने बताया कि पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उन्हें सबसे ज्यादा उनकी मां ने ही प्रेरित किया। परीक्षाओं के समय मां सभी बच्चों को पढ़ाई करवाती थी। घर और खेती का सारा काम खुद ही संभालती थी।

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नेहा ने बताया कि वह बड़ी होकर शिक्षिका बनना चाहती हैं, ताकि अपने जैसे दूरदराज के इलाकों के बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकें। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां, परिवार और स्कूल के शिक्षकों को दिया।

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