Tuesday, July 23, 2024
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बागियों को गले लगाकर मुश्किल में फंसी BJP: राणा के बाद अब मारकंडा बदलेंगे पाला!

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा उपचुनावों में भाजपा ने कांग्रेस के बागियों को टिकट दिया है। लेकिन कांग्रेस के बागी नेताओं को टिकट देने का कदम अब उनपर ही उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। भाजपा के कई दिग्गज नेता अब पार्टी को अलविदा कह रहे हैं। जो नेता पहले से ही नाराज चल रहे थे उन्हें भाजपा के इस निर्णय से पार्टी छोड़ने का बहाना मिल गया है।

रंजीत राणा ने 2022 में बीजेपी की टिकट पर लड़ा था चुनाव

भाजपा के कई नेता जो उपचुनाव की घोषणा होने के बाद से अपना टिकट पक्का समझ रहे, वह टिकट ना मिलने से अब अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहे हैं। लगभग सभी छह सीटों पर भाजपा को विरोध का सामना करना पड़ा है। सुजानपुर सीट से साल 2022 में भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कैप्टन रंजीत सिंह राणा ने तो अब कांग्रेस का दामन पकड़ लिया है।

राकेश कालिया भी भाजपा छोड़ कांग्रेस में आए थे

भाजपा अबतक अपने नाराज नेताओं को मनाने में कामयाब नहीं हो पाई है। बात यहां तक बिगड़ चुकी है कि रंजीत राणा अब कांग्रेस की तरफ से सुजनपुर सीट पर चुनाव लड़ेंगे। वहीं राकेश कालिया भी भाजपा को अलविदा कह कर कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने उन्हें भी उपचुनावों में गगरेट से प्रत्याशी हैं बनाकर उतरा है।

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इसी तरह से धर्मशाला, लाहौल स्पीति, बड़सर और कुटलैहड़ में भी बागियों को टिकट देने से भाजपा के कई नेता पार्टी से नाराज चल रहे हैं। भाजपा के नजरिये से कहें तो धर्मशाला में भी बात बिगड़ती नजर आ रही है। बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले राकेश चौधरी भी पार्टी से नाराज चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे भी लगातार कांग्रेस के संपर्क में हैं।

मारकंडा खुले आम कर रहे विरोध

राम लाल मारकंडा तो खुले स्वर में अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। वह जयराम सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे। राम लाल मार्कंडेय ने तो खुलेआम पार्टी से बगावत करके रवि ठाकुर को टिकट दिए जाने का विरोध किया था।

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उन्होंने पहले ही कहा दिया था कि वो कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं, हालांकि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें टिकट नही दिया। जिसके चलते अब उन्होंने आजाद चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।

वीरेंद्र कंवर भी चल रहे नाराज

कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा बैकफुट पर नज़र आ रही है। यहां वीरेंद्र कंवर भी पार्टी से नाराज चल रहे हैं। इन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था। वह भी जयराम सरकार में कृषि मंत्री रहे थे।

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वर्तमान समय में वे हिमाचल भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं। हालांकि वीरेंद्र कंवर ने अबतक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भी भाजपा छोड़ सकतें है।

लखविंदर राणा भी नाखुश

रिपोर्ट्स के अनुसार] नालागढ़ में भी कृष्ण लाल ठाकुर की भाजपा में वापसी लखविंदर राणा की नराजगी का कारण बनी है। उन्होंने साल 2022 का में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। हालांकि पार्टी ने उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए उनको भाजपा का प्रदेश स्तर का प्रवक्ता नियुक्त कर दिया है।

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भाजपा में आना थी सबसे बड़ी गलती

रोचक तथ्य यह है कि लखविंदर राणा खुद भी 2022 में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए थे। भाजपा से उनकी नाराजगी का स्तर यह है कि उन्होंने हिमाचल भाजपा अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल को कह दिया था कि कांग्रेस छोड़ भाजपा में आना उनकी बहुत बड़ी गलती थी। उनके अनुसार कांग्रेस पार्टी में उनके पास अधिक राजनीतिक अवसर थे।

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