ऊना। हिमाचल प्रदेश में माता के दरबार सिर्फ पूजा का स्थान नहीं होते, बल्कि भरोसे और विश्वास का ठिकाना माने जाते हैं। यहां लोग अपनी चिंता, पीड़ा और उम्मीदें माता को सौंप देते हैं। मान्यता है कि जब मनोकामना पूरी होती है, तो भक्त दिखावे से दूर रहकर चुपचाप अपना आभार अर्पित करते हैं। ऐसा ही एक दृश्य सोमवार को माता चिंतपूर्णी धाम में देखने को मिला, जिसने आस्था की इसी परंपरा को फिर जीवंत कर दिया।
25 तोले सोने का मुकुट किया दान
प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी मंदिर में सोमवार को पंजाब से आए एक श्रद्धालु ने माता रानी के चरणों में करीब 25 तोले सोने का मुकुट और टिका अर्पित किया। यह भेंट न किसी घोषणा के साथ आई और न ही किसी प्रचार के उद्देश्य से। श्रद्धालु ने अपनी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का आग्रह किया।
यह भी पढ़ें : चहेतों पर सुक्खू सरकार मेहरबान- रिटायर्ड अफसरों को फिर से नौकरी पर रखा,लाखों का खर्च
माता ने की मनोकामना पूरी
मंदिर के पुजारी संदीप कालिया के अनुसार यह भेंट किसी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थी। यह उस कृतज्ञता का परिणाम थी, जो मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त के भीतर स्वतः उमड़ आती है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु ने बस इतना कहा कि माता ने उसकी चिंता हर ली है, इसलिए यह समर्पण उनका निजी भाव है।
मौन दान की परंपरा
माता चिंतपूर्णी धाम में यह कोई नई बात नहीं है। यहां देशभर से आने वाले श्रद्धालु अपनी-अपनी सामर्थ्य और भावना के अनुसार भेंट चढ़ाते हैं। कई बार ये दान गुप्त रखे जाते हैं, क्योंकि मान्यता है कि सच्ची भक्ति नाम या पहचान की मोहताज नहीं होती। यह स्वर्ण मुकुट भी शायद किसी ऐसी ही मूक प्रार्थना और पूर्ण हुई मन्नत की कहानी कह रहा है।
यह भी पढ़ें : नशेड़ियों के निशाने पर हिमाचल के अस्पताल- सिरिंज चोरी के मामले में 10 अरेस्ट, बढ़ी निगरानी
40 लाख आंकी जा रही है कीमत
मौजूदा बाजार भाव के अनुसार इस स्वर्ण मुकुट और टिके की अनुमानित कीमत 40 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है। हालांकि मंदिर परिसर में चर्चा कीमत से ज्यादा उस श्रद्धा को लेकर रही, जिसने भक्त को इतना बड़ा दान करने के लिए प्रेरित किया। लोगों का कहना है कि माता के दरबार में मूल्य सोने का नहीं, भावना का होता है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल विधानसभा बजट सत्र: पहले ही दिन हंगामे के आसार, 125 सवालों से गूंजेगा सदन
भक्तों की मुराद पूरी करती हैं मां चिंतपूर्णी
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार माता चिंतपूर्णी अपने भक्तों की चिंताओं का हरण करती हैं और उन्हें संकटों से बचाती हैं। यही कारण है कि जब भक्त की मुराद पूरी होती है, तो वह इसे शब्दों में नहीं, समर्पण के रूप में व्यक्त करता है। सोमवार को हुआ यह दान उसी अटूट विश्वास का एक और उदाहरण बन गया।
