पालमपुर। हिमाचल प्रदेश की धरती सदियों से वीरों की जननी रही है। यहां के युवाओं के मन में देशभक्ति केवल एक भावना नहीं, बल्कि जीवन का संकल्प रही है। यह परंपरा आज की नहींए बल्कि भारत की स्वतंत्रता के साथ ही शुरू हो गई थी, जब हिमाचल के युवाओं ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना देश की रक्षा के लिए कदम बढ़ाए। इसी गौरवशाली इतिहास का सबसे बड़ा उदाहरण स्वतंत्र भारत के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा हैं, जिनकी जयंती पर शनिवार को पालमपुर में श्रद्धा और सम्मान के साथ उन्हें याद किया गया।

 मेजर सोमनाथ शर्मा  को दी  श्रद्धांजलि 

पालमपुर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में स्थानीय विधायक आशीष बुटेल ने वीर शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उन्हें नमन किया। इस अवसर पर शहीद की भतीजी राधिका शौनिक भी उपस्थित रहीं और उन्होंने अपने वीर पूर्वज को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियोंए प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने देश के इस महान सपूत के बलिदान को स्मरण किया।

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1947 में दिखाई अद्वितीय वीरता

वक्ताओं ने कहा कि मेजर सोमनाथ शर्मा का नाम भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। वर्ष 1947 के भारतदृपाक युद्ध के दौरान जब दुश्मन सेनाएं कश्मीर की ओर बढ़ रही थी, तब हिमाचल का यह शेर मात्र सात जवानों के साथ पाकिस्तान के 500 से अधिक जवानों के साथ भिड़ गया था। मेजर सोमनाथ शर्मा ने अपने अदम्य साहस व वीरता के दम पर पाकिस्तानी फोर्सेज के 500 जवानों को रोके रखा, जो लगातार मोर्टार दागकर भारतीय सेना पर हमला कर रहे थे। भारतीय सेना के पास गोला बारूद भी समाप्त हो गया था। मेजर सोमनाथ अन्य सात सैनिकों के साथ बलिदान हो गए।

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24 साल की उम्र में हो गए थे देश के बलिदान

मेजर सोमनाथ शर्मा 24 साल उम्र में देश के लिए बलिदान हो गए थे। कश्मीर पर कब्जे की पाकिस्तान की साजिश को उन्होंने नाकाम किया और वीरगति को प्राप्त हुए। देश के यह वीर सेना की कुमाउं रेजीमेंट में अधिकारी थे। उन्होंने तीन नवंबर 1947 को जान देकर श्रीनगर एयरपोर्ट को दुश्मनों से बचाया था।

हिमाचल का गौरवए देश का अभिमान

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए विधायक आशीष बुटेल ने कहा कि मेजर सोमनाथ शर्मा का बलिदान हिमाचल प्रदेश ही नहींए बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के युवाओं में देशभक्ति कूट.कूट कर भरी हुई है और यह जज्बा आज भी उतना ही मजबूत हैए जितना आजादी के समय था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत का पहला परमवीर चक्र हिमाचल के एक वीर सपूत को मिलना इस बात का प्रमाण है कि यहां के युवा हमेशा देश की रक्षा के लिए सबसे आगे खड़े रहे हैं।

 

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भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मेजर सोमनाथ शर्मा की शहादत आज की युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श है। उनका जीवन यह सिखाता है कि राष्ट्रसेवा सर्वोपरि है और देश की रक्षा के लिए किया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। उपस्थित लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया कि शहीदों की स्मृतियों को संजोने और आने वाली पीढ़ियों तक उनके त्याग की कहानी पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखा जाए।

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