शिमला। हिमाचल प्रदेश में पहले से ही बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं के लिए पशु मित्र भर्ती उम्मीद की एक किरण मानी जा रही थी, लेकिन यह प्रक्रिया धीरे-धीरे भरोसे की जगह आक्रोश का कारण बन गई। जिस भर्ती से रोजगार मिलना था, वही भर्ती युवाओं के लिए शारीरिक परीक्षा के नाम पर एक तरह की अग्निपरीक्षा बन गई। अब जब सवाल तेज हुए, तो सरकार ने प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया है।

25 किलो बोरी की हटेगी शर्त

हिमाचल प्रदेश में पशु मित्र भर्ती को लेकर उठे विवाद के बाद अब सुक्खू सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सुक्खू सरकार ने इस भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। वहीं इस भर्ती में बोरी उठाने की शर्त को भी खत्म करने का निर्णय लिया है। इसको लेकर विभाग की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग की ओर से जारी नए निर्देशों के अनुसार अब महिला और पुरुष अभ्यर्थियों को न तो पीठ पर और न ही सिर पर 25 किलो की बोरी उठाकर 100 मीटर की दूरी तय करनी होगी। पहले की नीति में एक मिनट के भीतर यह दूरी तय करने की शर्त रखी गई थी, जिस पर लगातार सवाल उठ रहे थे।

 

भर्ती प्रक्रिया के दौरान कई अभ्यर्थियों के बोरी उठाते समय गिरने की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सुक्खू सरकार की आलोचना तेज हो गई थी। विपक्ष ने भी इसे अमानवीय और अव्यावहारिक बताते हुए निशाना साधा था। अब सुक्खू सरकार ने हर तरफ से हो रही किरकिरी को देखते हुए इस भर्ती पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है और भर्ती के नियम और शर्तों में बदलाव का फैसला लिया है। जिसमें 25 किलो बोरी की शर्त को खत्म किया जाएगा।

विवादों में घिरी भर्ती प्रक्रिया

पशु मित्र योजना के तहत चल रही भर्ती उस वक्त विवादों के केंद्र में आ गई, जब फिजिकल टेस्ट में अभ्यर्थियों को 25 किलो वजन की बोरी उठाकर दौड़ाने जैसी शर्त सामने आई। युवाओं का कहना था कि यह परीक्षा न तो नौकरी की प्रकृति से मेल खाती है और न ही यह किसी वैज्ञानिक या व्यावहारिक आधार पर तय की गई थी। कई इलाकों में अभ्यर्थी इस शर्त को लेकर खुले तौर पर नाराज दिखे।

 

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बजट सत्र से पहले सरकार का फैसला

विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत से ठीक पहले सुक्खू सरकार ने पशु मित्र भर्ती की प्रक्रिया पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए। आदेशों में भर्ती रोकने का कारण “प्रशासनिक वजहें” बताया गया है। हालांकि, यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब प्रदेश के कई क्षेत्रों में फिजिकल टेस्ट पूरे हो चुके थे और कुछ जगहों पर चयन भी किया जा चुका था।

 

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चयनित अभ्यर्थियों में असमंजस

भर्ती रुकने से पहले जिन युवाओं ने फिजिकल टेस्ट पास कर लिया था और जिनका चयन हुआ था, वे अब सबसे ज्यादा असमंजस में हैं। उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि उनका चयन मान्य रहेगा या पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जाएगी। युवाओं का कहना है कि पहले कठिन और विवादित शर्तें थोप दी गईं और अब अचानक भर्ती रोककर उन्हें बीच रास्ते में छोड़ दिया गया।

विरोध के बाद आई रोक

पशु मित्र भर्ती को लेकर सोशल मीडिया, युवा संगठनों और स्थानीय स्तर पर लगातार सवाल उठ रहे थे। युवाओं ने इसे “रोजगार नहीं, मजाक” बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कहा गया कि सरकार ने बिना ज़मीनी हकीकत समझे फिजिकल टेस्ट तय कर दिए, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बाहर हो गए।

 

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सरकार की चुप्पी, सवाल बरकरार

फिलहाल सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि भर्ती प्रक्रिया कब दोबारा शुरू होगी और फिजिकल टेस्ट की शर्तों में क्या बदलाव किए जाएंगे। प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर प्रक्रिया रोक दी गई है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि गलती कहां हुई और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

 

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युवाओं में गुस्सा और निराशा

एक तरफ प्रदेश में छह लाख से ज्यादा बेरोजगार पंजीकृत हैं, दूसरी ओर जो भी भर्ती निकलती है, वह विवादों में घिर जाती है। पशु मित्र भर्ती पर लगी रोक ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हिमाचल में युवाओं के लिए योजनाएं ज़मीन पर सोच-समझकर बनाई जा रही हैं या सिर्फ कागजों में।

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