शिमला। हिमाचल में नशे की समस्या अब सड़कों और गलियों से निकलकर सीधे इलाज के केंद्रों तक पहुंच गई है। बाजार में सिरिंज की खुलेआम बिक्री बंद होने के बाद नशे की गिरफ्त में फंसे युवक-युवतियां अब अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। राजधानी शिमला के सरकारी अस्पतालों में सिरिंज चोरी की घटनाओं ने न सिर्फ स्वास्थ्य तंत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि नशे की लत किस हद तक खतरनाक मोड़ ले चुकी है।
अस्पतालों से गायब होने लगीं सिरिंज
शिमला के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में बीते कुछ समय से सिरिंज गायब होने की घटनाएं सामने आ रही थीं। शुरू में अस्पताल प्रबंधन को आशंका थी कि कहीं यह आंतरिक लापरवाही या स्टाफ से जुड़ा मामला तो नहीं है। लेकिन जब घटनाएं लगातार बढ़ीं, तो निगरानी सख्त की गई और सच्चाई सामने आ गई।
यह भी पढ़ें : चहेतों पर सुक्खू सरकार मेहरबान- रिटायर्ड अफसरों को फिर से नौकरी पर रखा,लाखों का खर्च
निगरानी बढ़ी तो सामने आया सच
जांच के दौरान पाया गया कि नशे के आदी युवक-युवतियां अस्पतालों के वार्ड और स्टोर रूम से सिरिंज चुरा रहे थे। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में ऐसे करीब 10 युवक-युवतियों को सिरिंज चोरी करते हुए पकड़ा गया। चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इन सिरिंज का इस्तेमाल कथित तौर पर चिट्टे जैसे सिंथेटिक ड्रग के सेवन में किया जा रहा था।
यह भी पढ़ें : हिमाचल विधानसभा बजट सत्र: पहले ही दिन हंगामे के आसार, 125 सवालों से गूंजेगा सदन
डीडीयू में नाबालिग पकड़ी गई
सबसे गंभीर मामला डीडीयू अस्पताल में सामने आया, जहां 16 साल की एक नाबालिग लड़की वार्ड से सिरिंज चुराते हुए रंगे हाथ पकड़ी गई। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक यह कोई एकल घटना नहीं है। इसी सप्ताह दो अन्य लोग भी सिरिंज चोरी करते हुए पकड़े गए, जिनमें एक नगर निगम शिमला का कर्मचारी बताया जा रहा है।
संक्रमण और जनस्वास्थ्य पर खतरा
अस्पतालों से सिरिंज की चोरी सिर्फ कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह संक्रमण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है। चोरी की गई सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल न केवल नशे के आदी लोगों की जान को जोखिम में डालता है, बल्कि बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ाता है।
यह भी पढ़ें : सुक्खू सरकार ने बदली एक और व्यवस्था- अब ऑनलाइन होगी शराब ठेकों की नीलामी, जानें
पुलिस तक पहुंचा मामला
अस्पताल प्रशासन ने सिरिंज चोरी के मामलों को लेकर थाना सदर में शिकायत दर्ज करवाई है। अधिकारियों का मानना है कि बाजार में सिरिंज की बिक्री पर रोक लगने के बाद नशे के आदी लोग वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं और अस्पतालों को निशाना बनाना उसी का नतीजा है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में चरस बेचने निकली थीं 3 महिलाएं- रास्ते में पुलिस से हुआ सामना, सभी गिरफ्तार
अस्पतालों में सख्त किए गए नियम
डीडीयू अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि अब प्रत्येक सिरिंज का हिसाब रखा जा रहा है और जरूरत के अनुसार ही वितरण किया जा रहा है। वहीं आईजीएमसी प्रशासन ने पैरामेडिकल स्टाफ की जिम्मेदारी तय करते हुए हर सिरिंज के इस्तेमाल और वितरण का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : फरवरी में ही गर्मी का एहसास, कल बारिश-बर्फबारी की संभावना; मिल सकती है राहत
नशे की समस्या का बदलता चेहरा
शिमला के अस्पतालों में सामने आए ये मामले इस बात का संकेत हैं कि नशे की समस्या अब और ज्यादा गंभीर होती जा रही है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ प्रतिबंध ही काफी हैं, या अब इलाज, काउंसलिंग और सामाजिक हस्तक्षेप की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही है।
