मंडी। हिमाचल प्रदेश में सरकारी और टैम्परेरी नौकरी की तलाश कर रही महिलाओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महिलाएं सिर पर करीब 25 किलो वजनी बोरी उठाकर दौड़ लगाती नजर आ रही हैं।
25 KG की बोरी उठाकर दौड़ी महिला
इसी दौरान एक महिला संतुलन बिगड़ने से बोरी समेत जमीन पर गिर जाती है। कुछ सेकेंड तक वह वहीं पड़ी रहती है, लेकिन दो से ढाई सेकेंड बाद खुद को संभालते हुए दोबारा उठती है और फिर से दौड़ने लगती है।
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मुंह के बल गिरी महिला
यह दृश्य केवल एक भर्ती परीक्षा का हिस्सा भर नहीं है, बल्कि प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, नौकरी के लिए मजबूरी, संघर्ष और युवाओं खासतौर पर महिलाओं की बेबसी को भी उजागर करता है।

महिला की वीडियो वायरल
वायरल वीडियो मंडी जिला के धर्मपुर डिग्री कॉलेज के खेल मैदान का बताया जा रहा है, जहां पशुपालन विभाग की ओर से ‘पशु मित्र’ पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
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वीडियो पर सियासत भी गरमाई
कई यूजर्स इस प्रक्रिया को महिलाओं के सम्मान और स्वास्थ्य से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस द्वारा मल्टी टास्क वर्कर और अन्य भर्तियों में शारीरिक परीक्षा को लेकर उठाए गए सवाल भी अब फिर से चर्चा में हैं।
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मजबूरी की परीक्षा...
यूजर्स का कहना है कि सत्ता में आने के बाद वही कांग्रेस अब उसी तरह की भर्तियों को सही ठहरा रही है, जिनका वह पहले विरोध करती रही है। कई लोग इसे “मजबूरी की परीक्षा” बता रहे हैं, तो कुछ इसे गरीब और बेरोजगार महिलाओं के साथ अन्याय करार दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या मात्र पांच हजार रुपए के मानदेय वाली नौकरी के लिए इस तरह की कठिन शारीरिक परीक्षा जरूरी है।
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कांग्रेस का तर्क: फिटनेस जांच जरूरी
विवाद बढ़ने के बाद सरकार और विभाग की ओर से इसे फिटनेस टेस्ट करार दिया जा रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हो रही है और इसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा।

पशुपालन विभाग का पक्ष
पशुपालन विभाग के डायरेक्टर संजीव कुमार धीमान ने भर्ती प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि ‘पशु मित्र’ को फील्ड में काम करना होता है। कई बार ड्यूटी के दौरान गाय-भैंस जैसे बड़े पशुओं को इलाज के लिए जमीन पर गिराना पड़ता है।
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आसान नहीं पशुओं का इलाज करना
टीकाकरण और दवाइयों के लिए करीब 25 किलो वजन वाले सिलेंडर भी उठाने पड़ते हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों की शारीरिक क्षमता और फिटनेस की जांच करना जरूरी है। उनका कहना है कि यह परीक्षा किसी को अपमानित करने के लिए नहीं, बल्कि काम की प्रकृति को देखते हुए रखी गई है।
5000 के लिए इतनी मेहनत?
प्रदेश भर में पशुपालन विभाग द्वारा कुल 500 ‘पशु मित्रों’ की भर्ती की जा रही है। चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिमाह मात्र 5,000 रुपए मानदेय दिया जाएगा। यही वजह है कि भर्ती प्रक्रिया और मेहनत के मुकाबले मिलने वाले मानदेय को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
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विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि इतने कम मानदेय पर इतनी कठिन शारीरिक शर्तें तय करना व्यवहारिक नहीं लगता। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है।
बेरोजगारी की तस्वीर या सिस्टम की सच्चाई?
धर्मपुर के मैदान में बोरी उठाकर दौड़ती महिलाएं सिर्फ भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि उस सच्चाई की तस्वीर बन चुकी हैं, जहां नौकरी पाने के लिए लोग अपनी शारीरिक सीमाओं से भी आगे जाने को मजबूर हैं।
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वीडियो पर छीड़ी बहस
यह वीडियो प्रदेश में रोजगार नीति, अस्थायी नौकरियों और मानदेय व्यवस्था पर एक बड़ी बहस छेड़ चुका है। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर कोई बदलाव करती है या भर्ती प्रक्रिया इसी तरह आगे बढ़ती है।
