सोलन। कहते हैं कि विधि के विधान के आगे किसी की नहीं चलती। जीवन और मृत्यु के फैसले भगवान के हाथ में होते हैं। ऐसा ही एक बेहद हृदयविदारक दृश्य हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक नगर बद्दी में देखने को मिला- जहां पोते की बरात निकलने से ठीक एक दिन पहले दादा ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
शादीवाले घर से उठी अर्थी
जिस घर में शहनाइयों की गूंज होनी थी, वहां पलभर में सन्नाटा और आंसुओं की खामोशी छा गई। नगर निगम बद्दी के वार्ड नंबर दो स्थित महाराणा प्रताप नगर में रहने वाले नीलम कुमार उर्फ नीलू के घर सोमवार को खुशियों का माहौल था।
यह भी पढ़ें : हिमाचल पशु मित्र भर्ती : पांच हजार सैलरी के लिए 25KG बोरी उठा दौड़ी महिला, मुंह के बल गिरी बेचारी
घर से निकलनी थी पोते की बारात
उनके पुत्र सागर की शादी जिला ऊना में तय थी और मंगलवार को बरात जानी थी। घर, गली और मोहल्ले को रोशनी से सजाया गया था। फूलों की सजावट, टेंट, लाइटें और अन्य सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई थीं। रिश्तेदार और परिचित बधाइयां देने पहुंच रहे थे।
दादा को पड़ा दिल का दौरा
रविवार रात करीब 11 बजे खुशियों के इस माहौल पर अचानक ग्रहण लग गया। नीलम कुमार के पिता और सागर के दादा, 82 वर्षीय मदन लाल की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें दिल का दौरा पड़ा। परिजन बिना देरी किए उन्हें PGI चंडीगढ़ लेकर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
यह भी पढ़ें : हिमाचल कैबिनेट से पहले दिल्ली चले CM : हाईकमान से करेंगे अहम चर्चा, मंत्रियों की बढ़ी धुकधुकी
परिवार में चीख-पुकार
डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें पहले से ब्रेन हैमरेज की समस्या भी थी। मदन लाल लंबे समय से बद्दी में एक छोटी दुकान चलाते थे और इलाके में उन्हें एक सुलझे और मेहनती व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। उनके निधन की खबर जैसे ही घर पहुंची तो चीख-पुकार मच गई।
शादीवाले घर में पसरा मातम
जिस घर में सुबह बरात की तैयारियां होनी थीं, वहां अचानक शोक की चादर बिछ गई। एक महीने से चल रही शादी की तैयारियां थम गईं। सजावट, रोशनी और खुशियों के रंग एक पल में फीके पड़ गए। शहनाइयों की जगह अब रोने-बिलखने की आवाजें गूंजने लगीं। घर के हर कोने में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।
यह भी पढ़ें : आखिर हिमाचल में हो क्या रहा है? अब सेब के बगीचे में मिली महिला की देह, रस्सी से बंधे से हाथ-पैर
शहर में बेटे की अच्छी पहचान
नीलम कुमार बद्दी में एक प्रसिद्ध हेयर ड्रेसर हैं और अपने मिलनसार स्वभाव के कारण शहर में उनकी अच्छी पहचान है। यही वजह है कि इस दुखद घटना से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा बद्दी शहर शोक में डूब गया। लोगों ने बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त की।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मदन लाल अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में दो बेटे, दो बेटियां और पांच पोते-पोतियां हैं। पोते की शादी देखने की इच्छा अधूरी रह गई। जिस दादा को बरात में सबसे आगे बैठना था, वही अब परिवार की यादों में सिमट कर रह गए हैं।
