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September 28, 2026

एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर हिमाचल लौटीं बेटियां, बैंड-बाजों के साथ हुआ जोरदार स्वागत

पुष्पा राणा ने उठाया खिलाड़ियों की नौकरी का मुद्दा

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himachal Indian Women Kabaddi Team

कांगड़ा। एशियन गेम्स में देश का परचम लहराने के बाद हिमाचल की तीन 'स्वर्ण परियां' अपने घर लौट आई हैं। भारतीय महिला कबड्डी टीम को गोल्ड मेडल दिलाने वाली कप्तान पुष्पा राणा, भावना ठाकुर और ज्योति ठाकुर के धर्मशाला पहुंचते ही जोरदार स्वागत किया गया। बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच खिलाड़ियों का फूल-मालाएं पहनाकर अभिनंदन किया गया। अपनी बेटियों की इस शानदार उपलब्धि पर साई धर्मशाला में हर कोई गर्व और खुशी से झूम उठा।

ईरान को हराकर भारत ने जीता गोल्ड

भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स के फाइनल मुकाबले में ईरान को हराकर स्वर्ण पदक जीता। फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक रहा, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने आखिरी तक हिम्मत नहीं छोड़ी और शानदार खेल दिखाते हुए जीत हासिल की।

 

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टीम की इस बड़ी जीत में हिमाचल से जुड़ी तीन खिलाड़ियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। तीनों खिलाड़ियों के वापस धर्मशाला पहुंचने पर साई परिसर में खुशी का माहौल देखने को मिला।

पुष्पा राणा ने उठाया खिलाड़ियों की नौकरी का मुद्दा

एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान पुष्पा राणा ने खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर भी बात रखी। उन्होंने हिमाचल सरकार से खिलाड़ियों के लिए नौकरी के मुद्दे पर जल्द फैसला लेने की अपील की। पुष्पा राणा ने मुख्यमंत्री से पहले हुई मुलाकात और नौकरी को लेकर मिले आश्वासन का भी जिक्र किया।

 

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उन्होंने कहा कि खिलाड़ी कई साल तक देश और प्रदेश के लिए मेहनत करते हैं। अब खिलाड़ियों की उम्र भी 29 साल हो चुकी है। ऐसे में उनके भविष्य और आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी सरकार को सोचना चाहिए। उन्होंने सरकार से खिलाड़ियों की नौकरी के मुद्दे पर जल्द पहल करने की मांग की।

ज्योति ठाकुर बोलीं- फाइनल में नहीं डगमगाया भरोसा

गोल्ड मेडल जीतने वाली ज्योति ठाकुर ने अपनी सफलता का श्रेय कोच, कबड्डी फेडरेशन, साई स्टाफ और अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि साई धर्मशाला में उन्हें अच्छी ट्रेनिंग और सुविधाएं मिलीं। फेडरेशन और पूरी टीम ने भी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखा।

 

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फाइनल मुकाबले को याद करते हुए ज्योति ने बताया कि ईरान की टीम काफी मजबूत थी और मुकाबला शुरू से ही कड़ा रहा। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया। सभी को भरोसा था कि टीम जीत सकती है। टीम वर्क और आत्मविश्वास के दम पर भारत ने ईरान को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

ज्योति का यह पांचवां इंटरनेशनल टूर्नामेंट

ज्योति ठाकुर ने बताया कि यह उनका पांचवां अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था। अलग-अलग जगहों और मौसम में खेलने का अनुभव अब काफी काम आता है। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे पूरी टीम की एकजुटता और कोच की रणनीति का भी बड़ा योगदान रहा।

 

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भावना ठाकुर की नजर अब कॉमनवेल्थ गेम्स पर

भावना ठाकुर के लिए यह एशियन गेम्स खास रहा, क्योंकि यह उनका पहला एशियन गेम्स था। गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कोच, फेडरेशन, माता-पिता, साई स्टाफ और पूरी टीम को दिया। उन्होंने कहा कि इस जीत में टीम के हर खिलाड़ी का बराबर योगदान रहा है।

 

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भावना ने बताया कि अब उनका अगला लक्ष्य कॉमनवेल्थ गेम्स है। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को संदेश देते हुए कहा कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार मेहनत करते रहना चाहिए। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।

भावना बोलीं- गोल्ड जीतना सपने के सच होने जैसा

भावना ठाकुर ने कहा कि हर कबड्डी खिलाड़ी का सपना होता है कि वह एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करे और मेडल जीते। उनके लिए गोल्ड मेडल जीतना सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई सालों तक मेहनत और त्याग करना पड़ा।

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साई धर्मशाला की तीन बेटियों ने बढ़ाया मान

साई धर्मशाला के सहायक निदेशक जेपी साहनी ने तीनों खिलाड़ियों की उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि साई धर्मशाला की तीन बेटियों का एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर लौटना पूरे सेंटर के लिए गर्व की बात है।

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उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत के साथ-साथ कोच का मार्गदर्शन और साई धर्मशाला में मिलने वाली सुविधाओं ने भी उनकी सफलता में मदद की है। साई और भारत सरकार की ओर से खिलाड़ियों को बेहतर ट्रेनिंग और सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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